Wednesday, 28 January 2015

बैठे हैं चौराहे पे सनम की राह देखते हुए.... बरसों बीत गये उनके इंतज़ार में.......

न वो आया न उनका पैग़ाम आया.....
करते हुए इंतज़ार, इन आखों में बड़ा सैलाब आया.....

Thursday, 22 January 2015

एक खाहिश है हमारी...की तुम रहो साथ हमेशा...
डाल हाथों में हाथ करे हम तय करे ये लंबा सफ़र...
न हो दिलों में दूरियाँ कभी... न हमारे बीच फासले....
ऐसी हो हमारी दास्तान...कि जिसे लोग भी सालों तक याद करें....

Saturday, 17 January 2015

न जाने कैसा है ये सफ़र....
बेचैन सा बस रहता हूँ....
तुमसे जो मिली है नज़र....
बिन तेरे खोया खोया सा रहता हूँ....
तुमको भी कुछ ऐसा एहसास होता है क्या....
कि होता हूँ तुमसे दूर लेकिन दिल तुम्हारे पास होता है....
कर तू भी कुछ कोशिश इतनी....
मिल गए हैं दिल....मिल जाएं हम भी दोनों एक दुसरे से....
सफ़र है बहुत लंबा....है मुश्किलों भरा....
चलो करते हैं मिलके इस तय....
ऐसी हो अपनी दास्ताँ की लोग भी वाह वाह कर उठे अपने प्यार पे....

यह तो बस हमारा प्यार जताने का एक नादान सा अंदाज़ था....
न जाने उन्हें क्यों बुरा लग गया....
उनका दिल दुखाने की तो हमारा कोई मन ना था....
खाहिश है दिल की एक, वो गुस्सा ना हों....
अपनों का ठेस पहुंचे ये हमारी फितरत में नहीं....

Sunday, 11 January 2015

कभी देखते आँखों में मेरी तो कसम खुदा की....
न खोजना पड़ता तुम्हे सारी दुनिया को....
मिल जाती मोहब्बत तुम्हे पहली नज़र में....
एक बार तो गौर से खोजा होता मेरी आँखों में....

Wednesday, 7 January 2015

अब तो वो सपनो में भी आने लगें हैं....
न जाने वो हमको या हम उनको हद से ज्यादा चाहने लगें हैं....
खोए खोए से रहते हैं हर दम....
जब से उनसे हम रोज़ाना बतियाने लगे हैं....
अब तो वो सपनो में भी आने लगे हैं....
न जाने कैसी हालत है उनकी हमारे बिन....
क्या ये जुदाई के लम्हे उन्हें भी तड़पाने लगे हैं...
अब तो वो सपनो में भी आने लगे हैं...

Tuesday, 6 January 2015

दास्ताँ अपनी क्या सुनायें यारों...
कुछ मंज़िल हमसे दूर, कुछ हम मंज़िल से दूर...
चार पल ज़िन्दगी के हम भी गुज़ार ले खुशियों से...
जो पूरे हो जाएँ अपने भी अरमां...

मत करना तुम दुआ मेरी लंबी उम्र की.... कही ऐसा ना हो की तुम छोड़ दो और मौत भी ना आए

कभी तो हम पे तुम्हारा एहसान हो जाए
जान तो बहुत गए तुम्हे बस अब थोड़ी पहचान हो जाए ।

यूँ तो पूरे ज़माने में दम नहीं की हमें खरीद पाए...
लेकिन उनकी अदा ही ऐसी है की दो प्यार के शब्दों से वो हमें ज़िन्दगी भर के लिए खरीद गए ।

एक तरफ़ा मोहब्बत हमेशा शायर को जन्म  देती है....
और दोनों तरफ की, एक नयी ज़िन्दगी को...

कहने को तो बहुत कुछ हैं उनके पास....
ना जाने क्या बात है...
है यह ज़माने का डर या फिर कुछ और....
जो इकरार ना करते हैं....

Thursday, 1 January 2015

जो गुज़रे साल की आखरी रात हुआ... वो इस साल न हो....
बड़ी मुश्किल से तो इकरार हुआ....बस अब कभी इनकार न हो....
दुआ करता हूँ कि मेरी बात में ही उनकी बात....
कुछ ऐसा ही यह नया साल हो....